
अहंकार बार-बार पुराने pattern में लौटना चाहता है। पुराने ढर्रे में उसे सुरक्षा मिलती है उसे कुछ नया करना नहीं पड़ता क्योंकि कुछ नया करने,सीखने में अहंकार को टूटना पड़ता है।🪔 मैं भी अपने जीवन में देखती हूं कि जब मैं गीता कम्युनिटी में और सत्रों में होती हूं ऑनलाइन तो वहां होना एक नई हिम्मत देता है, डर भागता है लेकिन जब वहां से अपने सामान्य निरस जीवन में लौटती हूं तो फिर वही पुरानी वृत्तियां होने लगती है।🥺 🪞🪞अभी वृत्तियां दिखाई देती है लेकिन एक डर भी साथ-साथ लगता है, उनसे बाहार आने में क्योंकि मैं (चुहिया) गीता सत्र (गजराज) को अपने बिल में ही व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही हूं।⛓️ आचार्य जी को अहंकार की यह चाल और उसका दब्बूपन मालूम है इसीलिए वह हमें बार-बार कृष्णत्व की राह पर चलाना चाहते हैं। 🪴🪴🪞



















