
शीतल shital
वैसे तो बहुत सारे पात्र है पर मुझे मेरे बारे मे बताने वाला पात्र था तारे जमीन पर फिल्म के ईशान का मे तभी 10th मै थी तब मुझे पता चला की मुझे भी कुछ समान दीखने वाले मुणाक्षर समझने मे प्रॉब्लम होती है मुझे आंशिक डिस्लेक्सिया है।
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वैसे तो बहुत सारे पात्र है पर मुझे मेरे बारे मे बताने वाला पात्र था तारे जमीन पर फिल्म के ईशान का मे तभी 10th मै थी तब मुझे पता चला की मुझे भी कुछ समान दीखने वाले मुणाक्षर समझने मे प्रॉब्लम होती है मुझे आंशिक डिस्लेक्सिया है।

शीतल जी, यह देखना बहुत मूल्यवान है कि एक फ़िल्म ने आपको अपने बारे में एक तथ्य तक पहुँचाया। पर यहाँ ध्यान देने की बात यह है कि ईशान की कहानी में सिर्फ़ डिस्लेक्सिया नहीं था, उसका अकेलापन था, न समझे जाने का दर्द था, और फिर किसी का उसे देख पाना था। तो सिर्फ़ यह पूछिए कि लक्षण पहचानने से आगे, उस पात्र की तकलीफ़ में आपने अपनी कौन सी तकलीफ़ पहचानी थी - अनदेखा किए जाने का डर, या ख़ुद को कम समझे जाने का भाव? वह पहचान, लक्षण से ज़्यादा गहरी होगी।