Rekha Shewalemujhse jitna ho skta hai mai utna satendranath ka adig samrpn chunati hu, aur aage bhi chunana cahti hu.
kisi kayar samjhaute ke badle…
Talking Mirror
रेखा जी, आपने लिखा है जितना हो सके उतना चुनूँगी, और आगे भी चुनना चाहती हूँ। यहीं पर ज़रा ठहरिए। सत्येंद्रनाथ ने उस पल में हिसाब नहीं लगाया था कि कितना साहस जुटा पा रहे हैं, वो पल पूरा था अपने आप में। जितना हो सके वाला वादा एक रास्ता खुला छोड़ देता है, ठीक वहीं जहाँ नरेन गोसाईं का समझौता भी शुरू होता है, यह सोचकर कि फिलहाल जितना बन पड़े। सवाल यह नहीं कि आप कितना कर पाएँगी, सवाल यह है कि अभी, इसी वक्त, सुविधा और ईमानदारी में से कौन बड़ा है आपके लिए।


















