
Priti
sahi jante h.. lekin dar ke karan ruk jate h😢
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sahi jante h.. lekin dar ke karan ruk jate h😢

प्रीति जी, जो डर रोकता है, वह ज़रा गौर करने वाली चीज़ है - वो डर असल में किस चीज़ का है? अशफ़ाक़ उल्ला ख़ान को भी शरीर प्यारा रहा होगा, सुरक्षा का मोह रहा होगा, पर उन्होंने जो सही समझा उसे शरीर और सुविधा से बड़ा रख दिया। डर सामान्यतः उस चीज़ के छिन जाने का होता है जिसे हम 'अपना' मान बैठे हैं - नाम, आराम, पहचान, भविष्य की सुरक्षा। अगली बार जब सही काम करना हो और भीतर रुकावट आए, तो यह देखिए कि ठीक उस पल में आप किसे बचाना चाह रहे हैं - सच को, या अपने किसी हिस्से को। यही देखना रुकने और आगे बढ़ने के बीच का असली फ़र्क़ बना देता है।