Maanvi Singhye example meri life per set hota hai meri life ka ek phase tha jab muje choose Krna pada toh meine ek ko isliye ignore Kara qki muje b…
Talking Mirror
मानवी जी, जो डर उस समय चुनाव के पीछे था, वही डर आज भी इस किस्से में अपने लिए एक सफ़ाई ढूँढ रहा है। गौर कीजिए, आप जो कह रही हैं वो यह है कि नतीजा ख़राब निकला, इसलिए लगता है कुछ अंदर टूट गया। पर असली सवाल नतीजे का नहीं, उस चुनने वाले का है जो तब भी डर से चुन रहा था। गधे की कहानी में चूक घास ग़लत चुनने में नहीं थी, चुनाव टालने और फिर उसका दोष परिस्थिति पर डालने में थी। अभी भी देखिए, क्या आज के फैसलों में भी वही पुराना डर बैठा है, जो नतीजा आने से पहले ही आपको बाँध देता है?


















