
✍🏻 पोस्ट 26 | 24 अक्टूबर ’26 💭 विषय — विश्वदर्शन ────────── 🌾 गौतमी और सरसों के दाने: वह घर कहाँ था, जहाँ कोई न मरा हो? कहानी कहती है कि श्रावस्ती में गौतमी नाम की एक स्त्री रहती थी। उसका एक ही बेटा था, जो खेलते-खेलते एक दिन मर गया। गौतमी यह मानने को तैयार नहीं थी। वह बच्चे के शव को गोद में लेकर घर-घर घूमने लगी: "कोई दवा दे दो, मेरा बेटा ठीक हो जाएगा।" लोग उसे पागल समझने लगे। 🙏 आख़िर किसी ने उसे बुद्ध के पास भेजा। बुद्ध ने उसकी पूरी बात सुनी और कहा: "दवा मिल जाएगी। शहर जाओ और थोड़े-से सफ़ेद सरसों के दाने ले आओ। पर दाने उसी घर से लाना, जहाँ कभी किसी की मृत्यु न हुई हो।" सरसों तो हर घर में होती है। गौतमी को लगा, यह बहुत आसान है। 🚪 पहले घर के लोग दाने देने को तैयार थे। गौतमी ने पूछा: "क्या यहाँ कभी किसी की मृत्यु हुई है?" जवाब मिला: "यह क्या पूछती हो? यहाँ जीने वाले थोड़े हैं, मरने वाले बहुत।" दूसरे घर में किसी का पिता गया था, तीसरे में किसी का पति, चौथे में किसी की बेटी। दाने हर घर में थे, पर ऐसा घर कहीं नहीं था। 🌙 शाम होते-होते गौतमी समझ गई। उसने बेटे का अंतिम संस्कार किया, बुद्ध के पास लौटी, और भिक्षुणी बन गई। 🪞 गौतमी पहले से जानती थी कि लोग मरते हैं। फिर भी उसे लग रहा था कि यह दुख केवल उसका है, सबसे अलग, सबसे भारी। बुद्ध ने उसे कोई सांत्वना नहीं दी, कोई उपदेश भी नहीं दिया। उन्होंने बस उसे घर-घर भेजकर दिखा दिया कि वह अकेली नहीं है। हम भी अपने दुख को ख़ास बना लेते हैं: "मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ?" यही सवाल दुख को सौ गुना भारी कर देता है। दुख उतना भारी नहीं होता, जितना यह मान लेना कि वह केवल मेरे साथ हुआ है। ❓ जब ज़िंदगी में कोई बड़ा नुकसान हुआ, क्या आपको भी यही लगा कि "मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ"? क्या आपने अपने दुख को सबसे अलग और सबसे भारी मानकर उसे और बड़ा कर लिया? A. हाँ, मुझे सच में लगता है कि मेरे जितना दुख किसी ने नहीं झेला B. दूसरों के दुख भी दिखते हैं, पर अपना दुख हमेशा बड़ा लगता है C. मुझे इस बात से तसल्ली मिलती है कि सबके साथ ऐसा होता है D. दुख को "सिर्फ़ मेरा" मान लेना ही उसे असहनीय बनाता है, यह दिख जाए तो दुख वैसा भारी नहीं रहता 📚 स्रोत 🔗 https://en.wikipedia.org/wiki/Kisa_Gotami 🔗 https://ancient-buddhist-texts.net/English-Texts/Dhamma-Verses-Comm/08-13.htm

















































