
🧑🎓"विद्यार्थी जीवन और मौज" 🤗💥 ✍️अभी मेरी बेटी की अर्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हुई है । कल भी परीक्षा है। तैयारी की उसने अपने एग्जाम की और साथ ही लगातार दूसरी चीजें भी सीख रही है। अभी उसने earth की संरचना के बारे वीडियो देखा और फिर drawing भी बनाई । एक दिन पहले तेज बुखार के साथ उसने अपना karate की परीक्षा भी pass किया । 👻मैं प्रतिदिन अपनी बेटी को आनंद से अपने सभी कार्यों को करने को कहती हूं। 📝लगभग रोज हम साथ में पृथ्वी, क्लाइमेट और उसके जीवन पर बात करते है। 🕵️वो बहुत प्रश्न करती है , और मैं उसे तर्क के साथ समझा पाती हूं। क्योंकि उसकी सभी जिज्ञासाएं वही हैं, जो मेरी या किसी भी आम मनुष्य की बचपन में होती है। ✍️लेकिन क्या हमे अपनी सभी जिज्ञासाओं के उत्तर मिल पाए अपने जीवन में?? नहीं?? क्योंकि शायद हमारे अभिभावकों को जीवन को समझने के प्रति विशेष निष्ठा नहीं दिखाई । इसलिए हर प्रश्न के उत्तर में हमे एक और अंधविश्वास दे दिया जाता था। 🤫इसका सीधा प्रभाव ये होता था , कि हमारे पास कोई प्रश्न ही शेष नहीं रह पाता था। अगर कुछ बचता भी था तो बस एक ही अंधविश्वास की " ऐसा तो होता ही है। " "ऐसा तो करना चाहिए।" 🙈🙉🙊 🔥आचार्य जी को बहुत सुना और समझ आया कि बच्चों की जिज्ञासा को मरने नहीं देना चाहिए । मेरे पास वास्तव में एक सीमा के बाद बेटी की बातों का कोई तार्किक जवाब नहीं होता , अगर मैने आचार्य जी को नहीं सुना होता ।🙏 मै अभी भी रोज उन मां बाप की बातें सुनती हूं , जो कहते है एग्जाम की टेंशन खत्म हो जाए ,फिर आराम होगा।🥵 🌟आचार्य जी की शिक्षाओं के कारण मैं निरंतर एक ही प्रयास करती हूं कि , मेरी बेटी परीक्षा की तैयारी करे, साथ ही कुछ भी उस के ऊपर बोझ की तरह आरोपित हो पाए । 🌿एक दृष्टि अपने ऊपर भी रखती हूं प्रतिपल, जिसमें मैं स्वयं को देख सकूं कि, कंही मेरी बेटी मेरी कामपूर्ति का साधन न बने। 🌟आचार्य जी बातों से ही यह समझ आया कि बच्चे को कामना केंद्र से नहीं पालना होता। उसे एक खुला मैदान चाहिए और खुला आसमान चाहिए, बाकी वो स्वयं ही देख लेगा।🙏🔥





















