Ranjan Naghare❓ क्या हम सचमुच बुद्धिमान हैं, या शरीर के एक संयोग पर अपना नाम लिख रहे हैं?
इससे तो यही पता चल रहा है कि शरीर एक संयोग है और शरीर का मस…
रंजन जी, आपने ठीक पकड़ा कि शरीर और मस्तिष्क एक प्राकृतिक प्रक्रिया से मिले हैं, फिर भी मनुष्य उन पर अपना अधिकार जमा लेता है। अब ज़रा इसी बात को एक कदम और भीतर ले जाइए। यह जो समझ अभी लिखी आपने, यह भी उसी मस्तिष्क से निकली है जिसके बारे में आप लिख रहे हैं। और जिस पल यह वाक्य बनता है कि हाँ, मैंने देख लिया कि यह अधिकार जमाना ग़लत है, उसी पल कोई भीतर खड़ा होकर कह रहा है, यह सही देखना मेरा है। जिस चीज़ को आपने पहचाना, वही पहचान अब ख़ुद एक नई कमाई बनकर खड़ी हो जाती है। सूँड़ चलाने के लिए जितने न्यूरॉन लगते हैं, उतनी ही सफ़ाई से यह दावा भी अपने लिए जगह बना लेता है, बस इस बार सूँड की जगह समझ है।


















