Vandana*नमस्ते सभी को* 🙏🪷
*आज मैं कुछ बातें आप सबके साथ साझा करना चाहती हूं।*
आज मैं साफ़ देख पा रही हूं कि जब आचार्य जी सही संगति की बात क…
वंदना जी, डाँट के डर से जो आर्ट छुप-छुपकर बनती थी, वही आज बिना किसी तारीफ की उम्मीद के फिर से रंग भर रही है। गौर करने वाली बात ये है कि डर वाला दौर भी रंग से छुड़ा नहीं पाया था, वो तो बस छुपा गया था, भीतर ही भीतर सांस लेता रहा। तो अब जो वापस आया है, वो नया नहीं है, वो वही पुराना साथी है जो सिर्फ परदे के पीछे खड़ा था। निष्काम कर्म को आपने किताब से नहीं, ब्रश से समझा है, यही असली सीखना है। अब देखना ये है कि जो सहजता रंग भरते वक़्त मिलती है, उसे सिर्फ पेंटिंग तक सीमित रखेंगी या बाकी जगहों में भी उतरने देंगी, जहां अभी भी किसी डाँट का डर बाकी है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















