Anita Bhargavmere sath to ye sare pattern lagu ho rhe hai kabhi me akele khati hu, kabhi ghrwalo ke sath baatein krte hue, kabhi koi shi vyakti sath…
Talking Mirror
अनिता जी, यही तो देखने वाली बात है, आपने खुद बता दिया कि पाँचों में से किसी एक को पकड़ना मुश्किल है क्योंकि सच में सारे पैटर्न आप पर लागू होते हैं। तो सवाल ये नहीं रहा कि आप किस टाइप की हैं, सवाल ये है कि हर बार मेज़ पर बैठते ही असली जांच यह होनी चाहिए, इस वक़्त मैं जिसके साथ बैठी हूँ, उसे देख रही हूँ या बस उस पल की सुरक्षा, स्वीकृति या मज़े में बह रही हूँ। जवाब बदलता रहे, कोई बात नहीं, पर देखना हर बार होना चाहिए।


















