
❓ जब कोई मेरी समझ, मेरी पहचान या मेरी श्रेष्ठता को चुनौती देता है, तब मेरे भीतर क्या होता है? 🌱 जब कोई मेरी समझ, मेरी पहचान, मेरी श्रेष्ठता को चुनौती देता है, तब मेरे भीतर कुछ टूटता है, कुछ अच्छा सा नहीं लगता और तुरंत प्रतिक्रिया दे देती हूं, उस पहचान को बचाने के लिए। उस समय तो यह लगता है कि जो मैं बोल रही हूं वह सही है। लेकिन जब गहराई से बाद में देखती हूं तो दिखता है कि मैं अपनी पहचान को बचा रही थी, पर यह सब उस एक क्षण में नहीं हो पाता। उस क्षण में सब कुछ बहुत जल्दी हो जाता है। कभी कबार होता है कि जब उस एक क्षण को पकड़ लेती हूं तो शरीर में जो ऊर्जा का प्रवाह तेजी से होता है वह धीरे-धीरे कम हो जाता है।



















