
सही काम वो जो आपके होने का अहसास न होने दे। और सही काम में डूबना ही ध्यान है। पिछले 4 महीनों से मैं संस्था में काम कर रहा हूँ, और 4 महीने कैसे निकल गए पता ही नही चला। और संस्था में काम करते वक्त समझ आ रहा है कि ये काम कितना ज़रूरी है और जनकल्याण के लिए उपयोगी है। इस काम के माध्यम से मेरी बहुत सी चीज़ें छोटी हैं जैसे: व्यर्थ के ख्याल आना, भूत और भविष्य की चिंता से मुक्त, व्यर्थ लोगों से मुक्ति, और समय का सही सदुपयोग कर पा रहा हूँ। संस्था में काम करने का ये सहज फल है कि आप बाहर की व्यर्थ चीज़ों से काफ़ी हद तक जाते हैं। और यदि नीयत साफ़ है तो अपने आप को और बेहतर पायेंगे। इसे मैं एक रहीम जी दोहे के माध्यम रखना चाहूंगा: एकै साधे सब सधै, सब साधै सब जाय। रहिमन मूलहिं सींचिबो, फूलै फलै अघाय॥ इसका मतलब साफ़ हैं कि बस उस चीज़ को साध लो , उसे उसका हक दे दो उसके बाद सारी चीज़ें स्वतः ही फल फूल जाती है।





















