
गीत बहुत ही सुंदर है। रोम रोम जोस से भर जाता है। प्रदीप जी राष्ट्रीय कवि थे। बहुत सुंदर लिखा है। और लता जी की आवाज गीत को अमर बना दिया है। एक वीर सैनिक देश की रक्षा करते हुए "शहीद" हो जाता है। एक सैनिक जो अपना बहुमूल्य जीवन देश को समर्पित कर देता है। उसी देश के अंदर जातियों में बँटा हुआ समाज, सामाजिक कुरीतियों का पालन कराने के लिए बड़े बड़े मंचों से उपदेश दिये जा रहे हो। धर्म को पाखण्ड और कामनाओं का धंधा बना लिया हो । तो जो वह वीर सैनिक देश के खातिर शहादत हो रहा है। वो देश की हालत हम ऐसे बनाए बैठे हैं। कोई अपना जीवन यो ही नहीं दे देता है। उसे अपने देश के प्रति प्रेम होता है। मुझे ख़ुद ये समझना होगा मुझे इस देश के प्रति कितना प्रेम है। क्या मैं पाखण्डी हूं, क्या मैं कामनाओं से ग्रसित हूं। क्या मैं उन धार्मिक मान्यताओं को मानता हूं। जो सिर्फ अहंकार को ही पालती, पोषती हो। क्या मुझमे आत्मज्ञान है। क्या मैं खुद को जानता हूं। ये प्रश्न अपनेआप से हर पल याद रखना होगा। तभी उस वीर सैनिक की शहादत सार्थक होगी। भारत में वेदांत, उपनिषदों, श्री भगवत गीता ये ग्रंथ हमें खुद को जानने को कहते हैं। क्या हम उनके मूल विचारो को जानने की कोशिश करते हैं? ये ग्रंथ हमें झूठ का नकार और सच के राह चलने को कहते हैं। एक सैनिक देश के खातिर शहादत को स्वीकार करता है तो मैं भी देश के अंदर सच को जगाने की प्रतिज्ञा करता हूं।



















