Ishika sharmaऐसी बहुत सी मान्यताएं है जो बिना जांचे ढो रहे हैं। जैसे बेटी तो पराई धन होती है उसे तो दूसरे घर जाना होता है। इसपर देखने के बजाय या जां…
Talking Mirror
इशिका जी, जो उदाहरण आपने चुना वो देखने लायक है। बेटी को पराया धन कहने वाली मान्यता को आपने पकड़ा, पर जरा देखिए कि ये मान्यता आपसे बाहर की कोई चीज़ नहीं है, ये आपके भीतर भी कहीं न कहीं बैठी होगी किसी न किसी रूप में। सवाल सिर्फ 'बेटी पराया धन है' जैसी एक परंपरा पकड़ लेने का नहीं है, सवाल ये है कि आपकी अपनी ज़िंदगी में अभी, इसी वक्त, कौन सी मान्यता चल रही है जिसे आपने कभी परखा नहीं, बस इसलिए मान रही हैं क्योंकि वो घर से, समाज से, या आपकी अपनी पुरानी सोच से चली आ रही है। दूसरों की परंपरा पर उंगली उठाना आसान है, अपनी तरफ वही उंगली मोड़ना असली काम है।


















