
आज आप सबके साथ कुछ साझा करने का मन हो रहा है। यह कुछ तस्वीरें पिछले दस सालों में आए हुए परिवर्तन की हैं। और पिछले तीन सालों में परिवर्तन का rapid phase रहा है। परिवर्तन ऊपरी से ज्यादा भीतर हुआ है। पिछले डेढ़ साल में मैंने बहुत सारे सत्र आचार्य जी के सामने बैठकर सुने, बहुत सारे सवाल भी आचार्य के सामने रखे। कल मैं कुछ सवालों की रिकॉर्डिंग देख रही थी और देखा कि कितना ज्यादा उतावलापन था मुझमें। अभी भी कितनी गहराई में बैठ पा रही हूँ, पता नहीं है, लेकिन खुद को पिछले तीन सालों से तो बहुत अलग पा रही हूँ। वो जो हर बात पर चिंता करती थी, वो बहुत बदल गई है। वो जो हमेशा खुद को सुपीरियर मानती थी, वो कितनी ज्यादा अंदर डरी हुई रहती थी, इसलिए बाहर सबको दिखाती थी कि मैं कितनी साहसी हूँ, वो भी अपने ऊपर हँसना सीख रही है। घर में बस मेरा ही राज चलेगा, ऐसी थी मैं। आज भी थोड़ी वो बची हुई है, लेकिन उसको हर बार पकड़ती हूँ। सामने वाले की बात को काटकर अपनी ही सुनाना, ये तो हर बार होता था। अभी भी कभी होता है, लेकिन उसको पकड़ना भी साथ-साथ चलता है। खुद को थोड़ा पीछे रखकर बात को समझना सीख रही हूँ। आज बेटों के साथ रिश्ता, शारीरिक माँ से बढ़कर एक गीता प्रतिभागी के स्तर पर आ गया है। यही सबसे बड़ा परिवर्तन है मेरे जीवन का। क्योंकि घर, पति, बच्चे इन्हीं में अपना सब कुछ खोजती रहती थी। बात तो पहले से ही शांति से करती थी, लेकिन वो शांति नैतिकता से आती थी, अब वो समझ के साथ है। फिर से कहना है कि गहराई कितनी है? ये भी पता नहीं। आज एपी फ्रेमवर्क पढ़ रही थी, मिरर से पूछा कि मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है। मैं बस पढ़े जा रही हूँ, तो मिरर ने जवाब दिया कि पूछिए खुद से: ये बात मेरी ज़िंदगी में कहाँ दिख रही है? फिर से, पढ़ना शुरू कर दिया और अपने जीवन को भी नए सिरे से देखना भी। अहंकार को एक बाहरी बिंदु की आवश्यकता हमेशा रहती है क्योंकि अहंकार स्वयं का आकलन कभी भी तटस्थ होकर नहीं कर सकता। एक गुरु का साथ हमेशा जरूरी है, ताकि सही राह से भटकने का विकल्प ही ना बचे। आचार्य जी, आपके साथ यह यात्रा सहज लगती है।🪔🪔 क्योंकि अगर इस यात्रा को मैं चलाऊँ तो… चलाकर तो देख लिया….😅😂 अब तो.. नैया तेरी राम हवाले, लहर लहर हरि आप सँभाले। 🙏🙏🙏🙏










































