मेरे साथ भी ऐसा ही होता आया है मेरे माता पिता कहते की सही से कपड़े पहनो साथ में दुप्पटा रखो लड़के की नजर ठीक नही होती है घर से ज्यादा देर बाहर मत रहो कुछ गलत हो जाएगा तुम्हारे साथ तुम लड़की हो और में उनकी हर बार मानती थी और फिर वो मुझे कहती की तुम बहुत अच्छी बेटी हो पर में ये सब करके खुश नही रहती हु और सोचती थी सायद ऐसा ही होता है क्योंकि माता पिता ने मुझे जन्म दिया है और पालन पोसन किया है तो वो मेरे लिए जो भी फैसला करेंगे सही ही होगा पर, जब में आचार्य जी की वीडियो यूट्यूब पर देखी तो में बार बार देखना शुरू कर दिया क्योंकि ये वो बाते सब थी जो मेरे मन में चलती रहती थी और अब में घर में जब भी बाहर जाने से मना करती हु तो में सवाल करती हु की में अपनी मर्जी से क्यों नही जी सकती हू तो जबाब आता है की मेरी बेटी हो में जो कहूंगी वही करना परेगा और मैं उनकी बात नही मानती तो वो अब मुझे अच्छी नही कहती है बल्कि वो ये कहती है की मैने जो संस्कार दिए की अपने से बड़े की बात मानना चाहिए तुम वो बात भूल गई इसलिए तुम पर से भरोसा उठ गया है माता पिता के ऐसे व्यवहार से मुझे दुख तो बहुत हुआ की जब तक में आपकी बात सुनती और मानती रही में एक आज्ञाकारी बेटी थी और आज जब में आपकी बात सुनने से इनकार किया तो में आज्ञाकारी बेटी नही रही पर मैं बहुत बहुत धन्यवाद देना चाहती हू आचार्य जी का जिसको सुनने के बाद मेरे मन में खुद को जानने की इच्छा हुई है और मैं अब सिर्फ खुद को जानने का प्रयास कर रही हूं क्योंकि ये मेरा जीवन है और में इस जीवन को खुद के लिए जिउगी मुझे क्या खाना है कैसे रहना है और क्या पहनना है ये सब कुछ सिर्फ मेरा फैसला होगा l आपको जितना धन्यवाद आचार्य जी करू उतना ही कम है , होगा , और अगर इस जीवन में कभी मौका मिले तो में जरूर आपने मिलना चाहूगी ll


















