Gayatri MakwanaAgar panchayat ko bhi paisa ,sansadhan or swatantrata mil bhi Jaye tab bhi wo badal k achcha ho jayega uski koi guarantee nahi hai kyuk…
गायत्री जी, आपने लिखा कि जब तक आत्मज्ञान नहीं होगा तब तक उसे अपना ही घर दिखेगा, दूसरे की परेशानी नहीं। यह बात प्रधान पर जितनी सच है, उतनी ही उस हर इंसान पर भी सच है जो व्यवस्था चलाता है, चाहे वो किसी दफ़्तर में हो, किसी घर में हो, या यहाँ इस सवाल का जवाब लिख रहा हो। अपना घर दिखना एक आम नियम है, कोई प्रधान की ख़ास बीमारी नहीं। तो सवाल यह बनता है, व्यवस्था बदलने से पहले यह आत्मज्ञान कहाँ से आएगा, यह उस इंसान का अपना चुनाव है या किसी नियम-कानून से आ जाएगा? और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















