Babita Kumariसर्वेश भैया आपका परिवार देखकर बहुत खुशी होता रहता है आज मेरा भी परिवार मेरे साथ गीत से जुड़ा रहता मैं भी शायद ज्यादा सुकून से रहती कोश…
Talking Mirror
बबीता जी, आप अकेली गीता के साथ हैं - यह कोई कमज़ोर जगह नहीं है, यह शुरुआत की सबसे ईमानदार जगह है। परिवार वालों में अहंकार बहुत है, यह कहना आसान है; पर ज़रा देखिए कि जब आप यह कहती हैं तो निगाह कहाँ टिकी है - उनके अहंकार पर, या अपने भीतर जो रोज़ घुल रहा है उस पर? सर्वेश जी का परिवार साथ है तो अच्छा लगा, पर आपका रास्ता उनकी तुलना से नहीं बनेगा। आप जुड़ी रहिए, सीखती रहिए, और घर में जो बदलाव आपके भीतर से दिखेगा, वही किसी और को खींचेगा - कोशिश और भाषण से नहीं।


















