
Iram ahmad
किसने दिया यह हक़? औरत की वर्जिनिटी जाँचने का हक़ किसी ईश्वर ने नहीं दिया, किसी धर्म ने नहीं दिया, किसी प्रकृति ने नहीं दिया। यह हक़ हमने ही समाज को दिया है अपनी चुप्पी से, अपने डर से, अपनी स्वीकृति से। जिस दिन स्त्री यह कह दे कि “मेरे शरीर का प्रमाणपत्र किसी को नहीं दूँगी,” उसी दिन इस तथाकथित इज़्ज़त का बाज़ार ढहने लगेगा। प्रेम का संबंध विश्वास से होता है, जाँच से नहीं। जहाँ परीक्षा माँगी जा रही है, वहाँ प्रेम नहीं मालिकाना हक़ छिपा बैठा है। 🙏आचार्य जी की शिक्षा यही याद दिलाती है कि *दासता बाहर से कम, भीतर की स्वीकृति से ज़्यादा चलती है।* जिस दिन स्वीकृति समाप्त होगी, अन्याय भी टिक नहीं पाएगा.



















