Goyal jo real world h hame usee kabhi uski vastvik rup me dekhte hi nhi h ham to sirf hamare swarth ke hisab se najariya rakhate h agr koi ch…
Talking Mirror
गोयल जी, आपने खुद लिख दिया कि नुकसान दिखे तो हम या तो मना कर देते हैं या नज़रअंदाज़ कर देते हैं जैसे कुछ है ही नहीं। अब यही बात अपने आखिरी वाक्य पर रख कर देखिए, "हमें हमारी समझ को बढ़ाना चाहिए" कहना कितना आसान है, और वो कौन तय करेगा कि समझ बढ़ी या धारणा बढ़ी। वही सवाल जो आपने बुज़ुर्गों और युवाओं के लिए उठाया, वो अपने ऊपर भी उतनी ही ताकत से आता है या रुक जाता है जहाँ खुद की बात शुरू होती है। संघर्ष का ज़िक्र आपने किया, वो संघर्ष असल में यही है, देखना और न देखना चाहना एक साथ चलते रहना। इसे किताबी समझ की तरह मत रख दीजिए, इसे अपने आज के किसी एक फैसले पर आज़मा कर देखिए।


















