TARENDRA KUMARमुझे लगता है कि मैं जो भी करता हु! मै उसे जानता हूं।लेकिन यह वास्तव में मेरे अहम द्वारा निर्मित अवधारणा है।वास्तव में मैं उन चीजों के ब…
Talking Mirror
तारेन्द्र जी, आपने खुद लिखा कि जानकारी अधूरी है, और फिर भी मन कहता है कि जानकारी सही से है। गौर करने वाली बात ये है कि यह दूसरा दावा पहले दावे को मिटाता नहीं, बस उसके ऊपर एक और परत चढ़ा देता है। अहम अधूरेपन को मान भी ले, तो भी यह कहने से नहीं चूकता कि बाकी जो बचा है वो तो पक्का है। यही वो जगह है जहाँ जांच रुक जाती है हर बार, ठीक वहीं जहाँ अहम को सुरक्षित रहना हो।


















