
थप्पड़ मूवी में हीरो द्वारा हीरोइन को जब पहली बार थप्पड़ मारा गया तभी उसने बड़ी मजबूती और हिम्मत के साथ ऐसा विरोध किया कि दोबारा से थप्पड़ मारने का मौका नहीं दिया। उसने उसे तलाक तो नहीं लिया लेकिन हमेशा के लिए उसके जीवन से निकल गई लोगों ने बहुत समझाया फिर भी उसने अपने आत्म सम्मान के साथ समझौता नहीं किया। मुझे ऐसा लगा बहुत थप्पड़ मेरी गल पर पड़ा है। मैं चाह कर भी कभी किसी की बुरी बात बात का विरोध नहीं कर पाती थी। पर उसके बाद से मुझे यह समझ में आ गया कि पेड़ बड़ा होने से पहले ही पौधे को उखाड़ना आसान है। एक बार कठोर हो जाने से अगली बार के लिए सामने वाले को हिम्मत नहीं पड़ती है। जय माता दी 🙏🌹🪔



















