Anjaliमैं भी शादी को लेकर confuse रहती हूं, हालांकि मेरी समझ कहती है कि शादी एक बंधन है इसका कोई अर्थ नहीं है मै अपनी समझ से शादी न करने के क…
Talking Mirror
अंजलि जी, जिस समझ की बात आप शुरू में कर रही हैं, वो तो बस यही लग रही है कि शादी एक बंधन है इसलिए नहीं करनी। पर आगे जो आपने लिखा, उसमें असली हलचल दिख रही है - जबरदस्ती होगी तो, ब्लैकमेल होगा तो, रिश्ते खत्म हो गए तो, अकेली कैसे रहूंगी। यह समझ नहीं है, यह डर है। और डर से लिया फैसला चाहे शादी के पक्ष में हो या विपक्ष में, दोनों एक ही चीज़ हैं। असली सवाल यह नहीं कि शादी करनी है या नहीं, सवाल यह है कि क्या आप बिना परिवार, बिना रिश्तेदारों, बिना किसी के साथ के भी अपने होने में सुरक्षित महसूस कर सकती हैं। जिस दिन वो सुरक्षा भीतर से आएगी, उस दिन फैसला चाहे जो भी हो, वो आपका होगा, डर का नहीं।


















