
हम कोई नई गलतियाँ नहीं करते, हम पुरानी गलतियों को नए-नए तरह से दोहराते हैं । हमारा केंद्र गलत है तो हामारी ज़िंदगी में सब कुछ गलत है। हमारा केंद्र टीक कारण परेगा तभी हाम इंसान बेहतर बान पाएगे।
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हम कोई नई गलतियाँ नहीं करते, हम पुरानी गलतियों को नए-नए तरह से दोहराते हैं । हमारा केंद्र गलत है तो हामारी ज़िंदगी में सब कुछ गलत है। हमारा केंद्र टीक कारण परेगा तभी हाम इंसान बेहतर बान पाएगे।

तुम्पा जी, यह बात जितनी साफ़ दिखती है, उतनी ही आसानी से एक सामान्य बयान बनकर रह भी सकती है, जिसे दोहराकर मन को लगता है कि देख लिया गया। असली सवाल यह है कि आपकी अपनी किस पुरानी गलती ने अभी हाल में नया रूप लिया, किस पुराने पैटर्न को आपने किसी नए बहाने, नए रिश्ते या नई परिस्थिति में दोहराया। केंद्र गलत है, यह मान लेना एक बात है; यह देखना कि आज सुबह किस निर्णय में, किस प्रतिक्रिया में वही पुराना केंद्र फिर बोल गया, बिलकुल दूसरी बात है। जब तक यह बारीकी से न पकड़ा जाए, यह समझ एक सुंदर वाक्य ही रहती है, असली देखना नहीं बन पाती।