आत्मा और चौरासी लाख योनियाँ || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
आचार्य प्रशांत
आपके बच्चे आपकी सुनते क्यों नहीं? || आचार्य प्रशांत (2017)
मन से दोस्ती करना सीखो || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)
माँसाहार के साथ चैन नहीं पाओगे || आचार्य प्रशांत (2016)
तुम्हारी दौड़ तुम्हें कहाँ ले जा रही है? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)
आप खिलिए, आपका बच्चा स्वतः खिल उठेगा || आचार्य प्रशान्त (2016)
माँ होना परमात्मा होने जैसी ज़िम्मेदारी है || आचार्य प्रशांत (2017)
माहौल में कृष्ण बैठे हैं या शकुनि? || आचार्य प्रशांत, युवाओ के संग (2012)
आपको ठीक वैसी दुनिया मिल जाती है जैसे आप हैं || आचार्य प्रशांत (2016)
सबके विचार, व्यक्तित्व और मानसिकताएँ अलग-अलग क्यों? || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2013)