🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquir... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/de... iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya... 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articl... ➖➖➖➖➖➖ #आचार्यप्रशांत #AcharyaPrashant #bhagavadgita #Women #education #freedom #unemployment #career #job #Marriage वीडियो जानकारी: 19.07.2026, श्रीमद्भगवद्गीता सत्र, ग्रेटर नोएडा Title: युवा: बेरोजगारी, अन्याय, आक्रोश और आंतरिक अँधेरा || आचार्य प्रशांत (2026) विवरण:- हममें से ज़्यादातर लोग मानते हैं कि हमारी ज़िंदगी के बड़े फैसले हमने खुद लिए हैं। लेकिन क्या सचमुच ऐसा है? नौकरी, शादी, करियर और मातृत्व, क्या इनमें हमारे अपने निर्णय ज़्यादा होते हैं या समाज की पुरानी मान्यताएँ? इस संवाद में आचार्य प्रशांत भारत में बढ़ती ग्रेजुएट बेरोज़गारी से शुरुआत करते हैं, लेकिन जल्द ही चर्चा उन मानसिक कारणों तक पहुँचती है जो हमें जोखिम लेने से रोकते हैं। बातचीत आगे बढ़ते हुए कामकाजी महिलाओं, विवाह, मातृत्व, आर्थिक स्वतंत्रता और फ़ेमिनिज़्म के उन पहलुओं पर सवाल उठाती है जिन पर हम अक्सर विचार ही नहीं करते। क्या हम नौकरी नहीं, सुरक्षा खोज रहे हैं? क्या करियर के समझौते हमेशा परिस्थितियाँ करवाती हैं, या हम खुद भी उन्हें स्वीकार कर लेते हैं? अगर कानून और अवसर पहले से कहीं ज़्यादा उपलब्ध हैं, तो भीतर की असुरक्षा अब भी क्यों बनी हुई है? यह वीडियो बेरोज़गारी या फ़ेमिनिज़्म पर तैयार जवाब नहीं देता। यह उन मान्यताओं को देखने का निमंत्रण देता है जिनके आधार पर हम अपने जीवन के सबसे बड़े फैसले लेते हैं, अक्सर बिना उन्हें कभी परखे। मुख्य विषय: बेरोज़गारी के पीछे छिपी मानसिकता कामकाजी महिलाओं के सामने वास्तविक चुनौतियाँ बाहरी स्वतंत्रता के बाद भी भीतरी बंधन 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFwe... ~~ ~~~