🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं? लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/hi/enquir... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #climatechange #globalwarming #hottestmonth #UN #extremeweather #BRICS2026 #BRICSSummit #BRICSDinner #BRICSMenu #BRICSMenuRow #BRICSFoodControversy #80PercentIndians #80PercentNonVegetarian #80Percent #NonVegetarianIndia #IndianFood #Vegetarianism #शाकाहार #मांसाहार #MeatConsumption #MeatIndustry #FoodPolitics #AnimalAgriculture #Veganism वीडियो जानकारी: 14.06.24, बातचीत सत्र, ग्रेटर नॉएडा विवरण:- ब्रिक्स सम्मेलन में विदेशी मेहमानों के लिए शाकाहारी भोजन पर बहस छिड़ी है। लेकिन क्या हमारी थाली में क्या है, यह सिर्फ़ हमारी निजी पसंद का मामला है—या इसका असर उस पृथ्वी पर भी पड़ता है जिस पर हम सब निर्भर हैं? मांसाहार को अक्सर स्वाद, संस्कृति या व्यक्तिगत पसंद से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन अगर हमारे भोजन का संबंध जंगलों, खेती, जानवरों और जलवायु संकट से हो, तो क्या “मेरी मर्ज़ी, मैं कुछ भी खाऊँ” कहकर बात खत्म की जा सकती है? यह चर्चा भोजन से आगे जाकर उस सोच पर सवाल उठाती है जिसमें खाने को केवल निजी मामला माना जाता है। जब खेती का बड़ा हिस्सा पशुओं के लिए भोजन उगाने में जाता है, जंगलों पर दबाव बढ़ता है और जलवायु संकट का बोझ सबसे अधिक गरीबों पर पड़ता है, तो हमारी थाली की कीमत कौन चुका रहा है? और जब खाने की पसंद को धार्मिक या राजनीतिक पहचान से जोड़ दिया जाता है, तो क्या हम असली सवाल से और दूर नहीं चले जाते? मुख्य विषय: मांसाहार और जलवायु संकट भोजन और प्रकृति का विनाश भोजन, धर्म और राजनीतिक पहचान ~~~~~~~~~~ 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~