🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquir... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/de... iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya... 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articl... ➖➖➖➖➖➖ #आचार्यप्रशांत #AcharyaPrashant #bhagavadgita #guru #friend #freedom #bhakti वीडियो जानकारी: 14.05.2026, वेदांत संहिता सत्र, लुधियाना, पंजाब Title: बाबा नहीं, यार आया है - मंतर नहीं, प्यार लाया है || आचार्य प्रशांत, लुधियाना (2026) विवरण:- हम अक्सर जिनसे सबसे ज़्यादा सीखते हैं, उन्हें इंसान की तरह देखना छोड़ देते हैं। धीरे-धीरे प्रेम की जगह पूजा ले लेती है, निकटता की जगह दूरी, और संवाद की जगह अंधभक्ति। इस संवाद में आचार्य प्रशांत इसी प्रवृत्ति पर प्रश्न उठाते हैं। वे बताते हैं कि गुरु कोई ऐसा चित्र नहीं जिसे सजाकर रख दिया जाए, बल्कि ऐसा दर्पण है जो हमें हमारी वास्तविकता दिखाता है। बातचीत गुरु-शिष्य संबंध, मित्रता, प्रेम, अहंकार, जिम्मेदारी, भक्ति और आत्मबोध जैसे विषयों से गुजरते हुए इस प्रश्न पर लौटती है कि क्या हम सच में सत्य चाहते हैं, या केवल ऐसी छवि जिससे हमारा मन प्रसन्न रहे? जब आचार्य जी कहते हैं, “बाबा नहीं, यार आया है” तो ये केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य संबंध को देखने का एक बिल्कुल अलग दृष्टिकोण है। यह संवाद याद दिलाता है कि कोई गुरु हमारे लिए जी नहीं सकता, हमारी नीयत के बिना हमें बदल नहीं सकता, या आजादी नहीं दे सकता। वह अधिक से अधिक दर्पण बन सकता है; देखना, स्वीकारना और बदलना हर व्यक्ति को स्वयं ही होता है। मुख्य विषय: गुरु को पूजना ज़रूरी है या समझना? प्रेम कब अंधभक्ति बन जाता है? दर्पण हमें क्या देता है, जो चित्र कभी नहीं दे सकता? 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFwe... ~~ ~~~