🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं? लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/en/join-live-sessions?cmId=m00036 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00036 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #आचार्यप्रशांत #ego #kabir #santkabir #body #identity #spirituality वीडियो जानकारी: 26.03.2026, संत सरिता, ग्रेटर नोएडा Title: जीभ चटोरी नहीं होती, अहंकार चटोरा होता है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी संत कबीर के भजन “खलक सब रैन का सपना” की पंक्तियों “निरखि मत भूल तन गोरा, जगत में जीवना थोरा” पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि सुंदर, युवा और बलवान शरीर को देखकर स्वयं को ही शरीर मान लेना एक बड़ी भूल है। आचार्य जी बताते हैं कि शरीर निरंतर बदल रहा है और प्रतिपल मृत्यु की ओर बढ़ रहा है, इसलिए इसे अपनी पहचान मानना बेईमानी भी है और बेवकूफी भी। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि अहंकार शरीर को अपना मानकर उसके ऊपर स्वामित्व जताता है, जबकि शरीर प्रकृति का है। इसी अहंकार को समझना अध्यात्म का मूल प्रश्न है - “मैं कौन हूं?” “अहंकार शरीर का मैल है।” “अध्यात्म तो सिर्फ एक प्रश्न पूछता है यह अहंकार क्या है?” “आत्मज्ञान माने अहंकार को जानना और किसको जानना और कुछ नहीं है जानने लायक।” “आत्म जिज्ञासा को ही धर्म कहते हैं, उसके अतिरिक्त कुछ नहीं होता धर्म।” “धर्म मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए नहीं होता, धर्म उसको जानने के लिए होता है जिसे सारी कामनाएं उठती हैं।” “जीभ चटोरी नहीं होती, अहंकार चटोरा होता है।” “अहंकार शरीर का शिकार करता है।” “दुनिया को लूटने के लिए अहंकार सबसे पहले अपनी ही गाड़ी को बर्बाद कर रहा है।” “शरीर के बाद अहंकार नहीं बचता।” “जीने के लिए अहंकार वैसे ही जरूरी नहीं है जैसे शरीर के स्वास्थ्य के लिए मैल जरूरी नहीं है।” 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06&nd=1&dlsi=0db8e0909301402f संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~