🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं? लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/en/join-live-sessions?cmId=m00036 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00036 ➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #आचार्यप्रशांत #santkabir #bhajan #ego #greed #problems #jealousy #doubtful #spirituality #Philosophy #vedanta वीडियो जानकारी: 07.04.2026, संत सरिता, देहरादून Title: जब मैं ही नकली हूँ, तो मेरा कोई असली कैसे हो सकता है? || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर लोभ, भय, शक और चालाकी – सबकी जड़ एक ही है || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर शक्की सब पर शक करता है, खुद पर नहीं || आचार्य प्रशांत, संत कबीर पर ➖➖➖➖➖ विवरण: यह वीडियो में आचार्य जी अहंकार को जीवन की मूल समस्या के रूप में समझाते हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि मद, लोभ, भय, शंका और चालाकी अलग-अलग समस्याएँ नहीं, बल्कि एक ही अहंकार की अलग-अलग छायाएँ हैं। आचार्य जी बताते हैं कि जब तक भीतर का झूठा ‘मैं’ मौजूद है, तब तक जीवन में शक और असुरक्षा बनी रहती है। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि केवल नीति, सही कर्म या बुरी आदतों को हटाने से समस्या की जड़ नहीं बदलती। स्वयं को न जानने के कारण ही मनुष्य बाहर धोखा खाता है, दूसरों पर शक करता है और अधिक चालाक बनने की कोशिश करता है। आचार्य जी समझाते हैं कि अहंकार का समाधान उसके केंद्र को देखने और आत्मज्ञान के प्रकाश में उसे समझने से ही संभव है। Context: खलक सब रैन का सपना खलक सब रैन का सपना । समझ मन कोई नहीं अपना ॥ कठिन है मोह की धारा । बहा सब जात संसारा ॥ घड़ा जो नीर का फूटा । पत्र ज्यों डार से टूटा ॥ ऐसे नर जात ज़िंदगानी । अजहुँ तौ चेत अभिमानी ॥ निरखि मत भूल तन गोरा । जगत में जीवना थोरा ॥ तजो मद लोभ चतुराई । रहो निसंक जग माही ॥ सजन परिवार सुत दारा । सभी एक रोज़ है न्यारा ॥ निकसि जब प्रान जावैंगे । कोई नहीं काम आवेंगे ॥ सदा जिनि जान यह देही । लगा ले नाम से नेही ॥ कहें कबीर अविनासी । लिये जम काल को फांसी ॥ ~ संत कबीर 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFwe... संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~