🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं? लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/en/join-live-sessions?cmId=m00036 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00036 ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #आचार्यप्रशांत #ego #krishna #shrikrishna #different #differences #ganesh #ganeshchaturthi #spirituality वीडियो जानकारी: 30.10.2025, गीता समागम , ग्रेटर नोएडा Title: “मैं” जितना हटता जाता है, एकत्व उतना बढ़ता जाता है || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर ➖➖➖➖➖➖ विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 6, श्लोक 30 के माध्यम से एकत्व का अर्थ समझाते हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि अहंकार और कामनाओं के कारण मनुष्य प्रकृति में ऐसे भेद देखने लगता है, जो वास्तव में होते ही नहीं। आचार्य जी बताते हैं कि जितने अधिक भेद दिखाई देंगे, उतनी ही बदलाव और इच्छाओं की प्यास बढ़ती जाएगी। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि प्रकृति को जानने के लिए अपनी मान्यताओं को थोपने के बजाय निष्पक्ष होकर उसका प्रेक्षण करना आवश्यक है। आचार्य जी समझाते हैं कि जब प्रकृति में एकत्व दिखाई देता है और स्वयं को भी उसी एकत्व का हिस्सा देखा जाता है, तभी अद्वैत का बोध होता है। कृष्ण कोई व्यक्ति मात्र नहीं, बल्कि सत्य मात्र हैं; कृष्ण से निकटता का अर्थ अपने और समस्त अस्तित्व के बीच के भेद को मिटाना है। “कृष्ण से दूरी क्यों?” “एकत्व माने क्या?” “उस एकत्व का नाम है श्री कृष्ण” “कृष्ण माने कोई व्यक्ति नहीं” “कृष्ण माने सत्य मात्र” “मनुष्य अकेला है, जो जैसा पैदा होता है उससे बहुत नीचे गिरने की क्षमता रखता है” “जितने अंतर दिखेंगे, बदलाव की उतनी प्यास रहेगी” “जितना ज्यादा भीतर भरी हुई है कामना, उतना क्या दिखाई देंगे? अंतर दिखाई देंगे।” “मैं को जैसे ही हटाते हो, वैसे ही प्रकृति में एकत्व दिखाई देना शुरू हो जाता है” “जहां प्रकृति का शोषण करना होता है, वहां पर फिर प्रकृति को लेकर कहानियां बनाई जाती हैं” 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06&nd=1&dlsi=0db8e0909301402f संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~