🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquir... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/de... iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya... 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articl... ➖➖➖➖➖➖ #आचार्यप्रशांत #AcharyaPrashant #bhagavadgita #education #genz #protest #Neetpg वीडियो जानकारी: 18.07.2026, बोध प्रत्यूषा सत्र, ग्रेटर नोएडा Title: जवान हो, नाराज़ हो? देश बदलना चाहते हो? तो सुनो ये बात || आचार्य प्रशांत (2026) विवरण:- हर आंदोलन बदलाव का दावा करता है। लेकिन क्या हर बदलाव सचमुच बदलाव होता है? जब भी व्यवस्था से असंतोष बढ़ता है, हम सड़कों पर उतरने, नारे लगाने, विरोध करने और सत्ता बदलने की बात करते हैं। लेकिन क्या कभी हम यह पूछते हैं कि जिस व्यवस्था को हम बदलना चाहते हैं, उसे बनाया किसने? अगर चुनने वाला वही है, सोच वही है और चेतना वही है, तो क्या केवल चेहरे बदलने से परिणाम बदल जाएंगे? इस गहन चर्चा में आचार्य प्रशांत आंदोलन, विरोध, लोकतंत्र, शिक्षा, इतिहास, मार्क्सवाद, सामाजिक सुधार और व्यक्तिगत जिम्मेदारी जैसे विषयों के माध्यम से उस प्रश्न की पड़ताल करते हैं, जिससे अक्सर हर आंदोलन बचता है: क्या बिना भीतर बदले बाहर की क्रांति संभव है? बातचीत में राजा राममोहन राय, गांधी, बुद्ध, मार्क्स और समकालीन आंदोलनों के संदर्भ भी आते हैं, लेकिन उद्देश्य किसी पक्ष का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि परिवर्तन की जड़ को समझना है। यह चर्चा आंदोलन के तरीकों पर नहीं, बल्कि उस मन पर प्रश्न उठाती है जो हर बार नया आंदोलन तो चाहता है, पर स्वयं को बदलना नहीं। मुख्य विषय: क्या केवल आंदोलन से समाज बदल सकता है? व्यवस्था के लिए वास्तव में जिम्मेदार कौन है? बाहरी क्रांति और भीतरी क्रांति में क्या अंतर है? 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFwe... ~~ ~~~