🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं? लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/en/join-live-sessions?cmId=m00036 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00036 📄 AP फ्रेमवर्क आचार्य प्रशांत के दर्शन का पूरा विवरण 🔥 🔗 यहाँ पढ़ें: https://acharyaprashant.org/hi/ap-framework ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #आचार्यप्रशांत #anger #fear #desires #life #अध्यात्म #spirituality वीडियो जानकारी: 29.03.2025, गीता समागम, ग्रेटर नोएडा Title : राम भजा सो जीता जग में || आचार्य प्रशांत, भगवद् गीता पर (2026) ➖➖➖➖➖➖ विवरण: स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे ध्रुवोः। प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ।।२७। यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः। विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ।।२८।। ~भगवद् गीता बाहरी स्पर्श, शब्द आदि विषयों को बाहर ही रखते हुए; दृष्टि को दोनों भौंहों के बीच स्थिर रखते हुए; नाक के भीतर संचरणशील प्राण और अपान वायु को सम रखते हुए; इंद्रियों, मन और बुद्धि को संयमित रखते हुए - जो मुनि इच्छा, भय और क्रोध से परे हैं, वे मोक्ष-परायण हैं और सदा मुक्त ही हैं। इस वीडियो में आचार्य जी श्रीमद्भगवद्गीता अध्याय 5 के श्लोक 27-28 पर चर्चा कर रहे हैं। आचार्य जी समझाते हैं कि संसार में रहते हुए भी भीतर की पवित्रता और आत्मा से जुड़ाव नहीं खोना चाहिए। आचार्य जी बताते हैं कि बाहरी चीज़ों को जीवन का केंद्र बना लेने से दुःख और अशांति पैदा होती है, इसलिए जीवन की डोर हमेशा सत्य और आत्मा के हाथ में रहनी चाहिए। आचार्य जी स्पष्ट करते हैं कि वास्तविक सफलता और संसार में विजय उसी को मिलती है जो भीतर से स्थिर और आत्मस्थ हो। वे योग, श्वास और सजगता के माध्यम से मन को संभालने का महत्व बताते हैं तथा समझाते हैं कि इच्छा, भय और क्रोध से ऊपर उठकर ही मनुष्य मुक्त जीवन जी सकता है। साथ ही, आचार्य जी निरंतर स्मरण और आत्मा से जुड़े रहने की साधना को सार्थक, स्वतंत्र और आनंदमय जीवन का आधार बताते हैं। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06&nd=1&dlsi=0db8e0909301402f संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~~