🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से मिलना चाहते हैं? लाइव सत्रों का हिस्सा बनें: https://acharyaprashant.org/hi/enquir... 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?... ➖➖➖➖➖➖ #acharyaprashant #climatechange #climatesolution #NuclearWar #PopulationExplosion वीडियो जानकारी: 11.04.2024, ग्रेटर नॉएडा विवरण:- जलवायु परिवर्तन के खतरे को समझकर अगर आपका पहला विचार यह हो कि ज्यादा से ज्यादा पैसा और संसाधन जमा कर लिए जाएँ, ताकि संकट आने पर कहीं छिपकर सुरक्षित रहा जा सके, तो क्या यह सचमुच बचने का रास्ता है? इस चर्चा में आचार्य प्रशांत जलवायु संकट के संदर्भ में इसी मानसिकता पर बात करते हैं। जलवायु परिवर्तन को किसी एक दिन में होने वाली तबाही के बजाय लंबे समय तक चलने वाली ऐसी प्रक्रिया के रूप में देखा गया है, जिसमें लोग धीरे-धीरे अपना घर, स्वास्थ्य, आजीविका और अपने प्रियजनों को खो सकते हैं। इसकी मार उन गरीब लोगों और पशुओं पर भी पड़ रही है, जिनका इस संकट में योगदान लगभग नगण्य है। बात आगे बढ़कर इस सवाल तक जाती है कि क्या इस संकट से केवल पैसा, तकनीक या संसाधन बचा सकते हैं। चर्चा जलवायु परिवर्तन को जैव-विविधता के विनाश, असमानता, बढ़ती आबादी, युद्ध और दूसरी बड़ी मानवीय समस्याओं से जोड़ते हुए उनके साझा मूल की ओर संकेत करती है—मनुष्य की बढ़ती भोग-वृत्ति और अपने ही भीतर के अज्ञान की ओर। मुख्य विषय: जलवायु संकट से बचने की हमारी मानसिकता गरीबों और पशुओं पर संकट की सबसे बड़ी मार जलवायु परिवर्तन और आत्मज्ञान का संबंध संगीत: मिलिंद दाते ~~~~~~~~~~