🧔🏻♂आचार्य प्रशांत गीता पढ़ा रहे हैं। घर बैठे लाइव सत्रों से जुड़ें, अभी फॉर्म भरें — https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00021 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00021 📲 आचार्य प्रशांत की मोबाइल ऐप डाउनलोड करें: Android: https://play.google.com/store/apps/details?id=org.acharyaprashant.apbooks iOS: https://apps.apple.com/in/app/acharya-prashant/id1603611866 📝 चुनिंदा बोध लेख पढ़ें, खास आपके लिए: https://acharyaprashant.org/en/articles?l=1&cmId=m00021 ➖➖➖➖➖➖ #आचार्यप्रशांत #acharyaprashant #independenceday #15august #freedom वीडियो जानकारी: 10.06.2025, भगवद् गीता सत्र, ग्रेटर नोएडा Title: (स्वतंत्रता दिवस विशेष) अंग्रेज़ तो चले गए, पर आज़ादी कहाँ है? || आचार्य प्रशांत (2025) 📰 Source : https://docs.google.com/document/d/1ZAstfmpjyctLtSC513LPTTSZKPvZh2j7YW1VmQed5N8/edit?tab=t.0 📋 Chapters: 0:00 - Intro 1:10 - आज़ादी का असली अर्थ क्या? 9:37 - इतिहास में हम गुलाम क्यों बने? 15:01 - द्वितीय विश्व युद्ध से एक सबक 20:35 - जागी हुई जनता क्या कर सकती है? 26:34 - 17 साल की एक निर्भीक लड़की 31:49 - महिला सैनिकों की अद्भुत कहानियाँ 38:56 - भारत को कौन कमजोर बनाता है? 43:51 - Testimonial विवरण: इस वीडियो में आचार्य जी बताते हैं कि सच्ची स्वतंत्रता केवल विदेशी शासन से मुक्ति नहीं, बल्कि भीतर की गुलामी से भी आज़ादी है। वे स्पष्ट करते हैं 1947 की राजनीतिक स्वतंत्रता के बाद भी जनता में आत्मसम्मान, जागरूकता और साहस का पर्याप्त संचार नहीं हुआ। द्वितीय विश्व युद्ध के उदाहरण, रूस और फ्रांस के नागरिक प्रतिरोध, तथा सोवियत महिला सैनिकों के अद्वितीय योगदान के माध्यम से वे दिखाते हैं कि जब जनता अपनी कमजोरियों, लोभ और भय पर विजय पा लेती है, तो कोई भी ताकत उसे गुलाम नहीं बना सकती। जातिगत भेदभाव, सामाजिक अन्याय और भीतरी पराधीनता को जड़ से हटाए बिना स्वतंत्रता केवल एक नारा बनकर रह जाती है—और इस स्वतंत्रता दिवस पर यही सबसे जरूरी संदेश है। 🎧 सुनिए #आचार्यप्रशांत को Spotify पर: https://open.spotify.com/show/3f0KFweIdHB0vfcoizFcET?si=c8f9a6ba31964a06 ~~