🧔🏻♂️ आचार्य प्रशांत से समझे गीता और वेदांत का गहरा अर्थ, लाइव ऑनलाइन सत्रों से जुड़ें: https://acharyaprashant.org/hi/enquiry-gita?cmId=m00031 📚 आचार्य प्रशांत की पुस्तकें पढ़ना चाहते हैं? फ्री डिलीवरी पाएँ: https://acharyaprashant.org/hi/books?cmId=m00031 #AcharyaPrashant #Shakti #WomenEmpowerment #महिलासशक्तिकरण #WomenSafety #GirlPower #StrongWomen #SelfEmpowerment #Women #NariShakti #FearlessWomen #StopAbuse #DomesticViolence #Suchika #Medalist #asiangames #goldmedal #WomenInSports वीडियो जानकारी: 02.10.2026, भगवद्गीता सत्र, ग्रेटर नोएडा Title: एक मेडलिस्ट लड़की का सवाल—और उसके पीछे छिपा एक बहुत गहरा सवाल: अगर मेरे साथ जुल्म हुआ है, तो क्या मैं हमेशा कमजोर ही रहूंगी? इस बातचीत में Suchika अपने अनुभव की कहानी साझा करती हैं। वह सिर्फ एक सवाल पूछने वाली लड़की नहीं हैं—वह खेल में मेडल जीत चुकी हैं, यानी संघर्ष, अनुशासन और जीत का अनुभव उनके जीवन का हिस्सा रहा है। फिर भी, किसी के द्वारा किया गया जुल्म इंसान के भीतर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ पैदा कर सकता है—खुद को दोष देना, हमेशा पीड़िता बनकर जीना या किसी दूसरे को अपना रक्षक बना लेना। आचार्य प्रशांत एक चौथा रास्ता सामने रखते हैं: जिसने तुम्हारी कमजोरी का फायदा उठाया, उसने तुम्हें तुम्हारी कमजोरी दिखा दी। अब उस कमजोरी को मिटाओ। क्योंकि दोषी को सजा मिलना जरूरी है, लेकिन केवल सजा मिल जाने से हमारी अपनी कमजोरी खत्म नहीं हो जाती। सशक्त होने का अर्थ सिर्फ दूसरों पर जुल्म न करना नहीं है। अपने ऊपर जुल्म सहना भी बंद करना है। एक मेडलिस्ट की आवाज़ में उठाया गया यह सवाल हर लड़की और हर उस इंसान के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपने जीवन में किसी तरह की कमजोरी, डर या शोषण से जूझ रहा है। “मैं कमजोर रहूंगी ही नहीं।” ————————