
अध्यात्म में संगत का बहुत बड़ा महत्व रहा है। बोध का मार्ग हो या प्रतिभा का, सत्संगत के माध्यम से गुणों में वृद्धि होना निश्चित है। व्यक्ति का जीवन दो ही आयामों पर चलता है - पाश्विक या सात्विक। अपने भीतर के पशु के खिलाफ जाने का नाम ही बोध है। सिख गुरुओं की शान ही रही है अपने ही भीतर बैठे पशु की क़ुरबानी देकर परमात्मा को समर्पित होने में। इस कोर्स के माध्यम से जीवन में ऊंँचाई की ओर बढ़ने हेतु आचार्य प्रशांत द्वारा सरल भाषा में समझाया गया है।
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