
कैसे जाने कि प्रेम हो गया?
सच्चा प्रेम किस से होता है?
संबंध और प्रेम में क्या अंतर होता है?
जब तक विश्व के प्रति आपका आकर्षण बना हुआ है तब तक संबंध तो बना लेंगे लेकिन प्रेम नहीं हो सकता है। कबीर साहब के दोहे हमें लगातार संकेत देते हैं कि मन की परतों को हटाना ही एकमात्र लक्ष्य है। परत हटने से तात्कालिक दुख तो होता है लेकिन दूसरी ओर जो मिलता वह बड़ा स्थायी है, बड़ा प्रेमपूर्ण है।
प्रेम में ही समर्पण होता है और समर्पण प्रेम को गहरा और सुंदर बना देता है।
इस पाठ्यक्रम के कुछ चुनिन्दा दोहे को आचार्य प्रशांत के माध्यम से सरल भाषा में समझाया गया है। जीवन को एक नई दिशा दीजिए आचार्य प्रशांत के साथ, कबीर साहब के दोहे पर आधारित इस सरल कोर्स में।
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