सही कर्म का चुनाव कैसे करें?

Thumbnail
AP Name Logo
श्रीमदभगवद्गीता अध्याय 3,4,7 और 8 पर आधारित
पूरी श्रृंखला देखें
1 घंटा 54 मिनट
हिन्दी
विशिष्ट वीडियोज़
पठन सामग्री
आजीवन वैधता
सहयोग राशि: ₹119 ₹500
एनरोल करें
कार्ट में जोड़ें
रजिस्टर कर चुके हैं?
लॉगिन करें
छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करें
वीडियो कोर्स को साझा करें
परिचय
लाभ
संरचना

कर्म क्या है? कर्म हमारी बेचैनी का ही प्रस्फुटन है। दुनिया में पाप का बढ़ना यह दर्शाता है कि कर्म गलत दिशा से उद्भूत हो रहा है। व्यक्ति मूल रूप से कामी है और आम आदमी का कर्म उसकी बेचैन कामनाओं से आता है। जिस प्रकार मधुमेह के मरीज़ की इच्छा मीठा खाने की होती है उसी प्रकार व्यक्ति की सारी इच्छाएँ उसी का नाश करने के लिए उठती हैं, अर्थात् उसे और रोगी बना देती हैं। इसलिए श्रीकृष्ण कह रहे हैं कि कर्म ऐसा करो जो रोगी कर्ता को योगी कर्ता बना दे। ऐसे कर्म को एक विशेष नाम से सम्बोधित किया गया है - निष्काम कर्म।

चेतना की उच्चतम अवस्था से फ़लित कर्म को निष्काम कर्म कहते हैं। श्रीकृष्ण ने अपनी असीम संभावना से अर्जुन को गीता का यह उपदेश दिया है। गीता को उपनिषद् का सार माना गया है और उपनिषद् सनातन धर्म का केंद्र कहलाते हैं।

आचार्य प्रशांत के माध्यम से मूल अहम् वृत्ति को असफ़ल करके निष्काम कर्म तक पहुँचने के आसान मार्ग को इस कोर्स के माध्यम से उपलब्ध कराये गये हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आप जिस उत्तर की तलाश कर रहे हैं वह नहीं मिल रहा है? कृपया हमारी सपोर्ट टीम से संपर्क करें।

कोई भी वीडियो श्रृंखला आचार्य प्रशांत के यूट्यूब वीडियो से कैसे अलग है?
क्या ये लाइव वीडियो हैं या इसमें पहले से रिकॉर्डेड वीडियो हैं?
वीडियो श्रृंखला के लिए सहयोग राशि क्यों रखी गयी है? यह निःशुल्क क्यों नहीं है?
सहयोग राशि से अधिक दान देने से मुझे क्या लाभ होगा?
वीडियो श्रृंखला की रजिस्ट्रेशन की प्रकिया के बाद मैं उसे कब तक देख सकता हूँ?
क्या वीडियो श्रृंखला के वीडियो को बार-बार देखने की सुविधा उपलब्ध है?
मुझे वीडियो श्रृंखला से बहुत लाभ हुआ, अब मैं संस्था की कैसे सहायता कर सकता हूँ?
130+ ईबुक्स ऍप में पढ़ें