
विवेक का अर्थ होता है— मूढ़ता में और सद्बुद्धि में चुनाव कर पाना। जो कुछ आपको पूर्णता की ओर ले जाए, शांति की ओर ले जाए वह सही है, और जो कुछ भी अशांति को बढ़ावा देता हो, डर से उपजा हो और प्रोत्साहित करता हो, वह गलत है।
मगर जीवन हम ऐसे जीते हैं कि न माया मिलती है न राम। एक बेचैनी और बेहोशी जीवन में बनी रहती है। तो फिर क्या करें इस बचे हुए जीवन का! ये जो थोड़ा सा जीवन मिला है इसे ही सूफी कभी गा के कभी कहानियों के माध्यम से हमें समझाते हैं।
आचार्य प्रशांत के संग इस कोर्स के माध्यम से हम जानेंगे की सूफी संत हमसे क्या कहना चाहते हैं।
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