गुरु गोबिंद सिंह जी का धर्म-संदेश: कलम हो या शस्त्र — उठे आत्मबल से

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युगपुरुषों का संघर्ष
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54 मिनट
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परिचय
लाभ
संरचना

साहस, बलिदान या भक्ति की बात आती है, तो उनमे गुरु गोबिंद सिंह जी का नाम सामने आता है। वे केवल योद्धा, समाज-सुधारक या संत नहीं थे — वे इन सबका संगम थे, और इनसे भी ऊपर।

ज़फ़रनामा, जिसे ‘विजय पत्र’ भी कहते हैं, गुरु गोबिंद सिंह जी द्वारा मुग़ल सम्राट औरंगज़ेब को लिखा गया साहस भरा पत्र है। यह उनकी कूटनीति और शौर्य को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, जिनकी जड़ें आध्यात्मिकता में थीं।

गुरु गोबिंद सिंह जी स्वयं तलवार उठाने की चुनौती देते थे , इस कठिन प्रश्न के साथ कि — "क्या मेरा जीवन स्वयं यह दिखाता है कि मैं सत्य के पक्ष में खड़ा हूँ — चाहे कीमत जो भी हो?"

इस वीडियो शृंखला में, आचार्य प्रशांत के माध्यम से आप गुरु गोबिंद सिंह जी के अंतरतम संघर्ष से रूबरू होंगे।

  • जहाँ भक्ति कमज़ोरी नहीं, प्रतिरोध की ज्वाला बनती है
  • अध्यात्म मौन नहीं, विद्रोह बन जाता है
  • और सत्य केवल कहने -सुनने की बात नहीं - इसे जीना और इसके लिए लड़ना पड़ता है
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

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