
जीवन में हल्कापन, आनंद,और मौज किसे पसंद नहीं? मगर हम हैं कि उस रास्ते पर चलने से घबराते हैं और पीठ करके उल्टा इतनी तेज़ी से दौड़ते हैं कि जैसे हमारा दौड़ना सफल हो जाएगा और हुम आनंद और प्रेम को प्राप्त हो जाएंँगे।
कबीर साहब ने भी कहा है जिस मार्ग साहब मिले वही प्रेम है, वही तुम्हारा घर है। इस बात को हम जितनी जल्दी भली भांति समझ लें इतनी जल्दी हम दुख और कष्ट के घेरे से मुक्त सकते हैं।
इस पाठ्यक्रम के माध्यम से आचार्य प्रशांत के संग हम जानेंगे कि कैसे हम स्वयं की राह में ही बाधा डाल देते हैं और इससे निकलने का क्या उपाय है।
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