
कृष्ण ने अध्याय 2 में ज्ञान पहले दिया ताकि कर्म अब ज्ञान से हो पाए। ज्ञान इसलिए नहीं दिया ताकि अर्जुन ज्ञानी हो जाएंँ।
मगर हमारा जीना ऐसे ही होता है। हम ज्ञान को थोड़ा भी कर्म में परिवर्तित नहीं करना चाहते क्योंकि उसमें एक बात है जो छिपी हुई है जो अहंकार को बिलकुल भी बर्दाश्त नहीं होती–
वह यह है कि वास्तव में ज्ञान हुआ ही नहीं है। क्योंकि ज्ञान होगा तो कर्म में परिवर्तित हो जाएगा। जिसे आनंद दिख गया, वह भला आनंद से क्यों चूकेगा?
अगर आप और हम आनंद से चूक रहे हैं तो संभाल कर क्योंकि हम ज्ञान से भी चूक रहे हैं। श्रीकृष्ण के साथ हो जाएं और ज्ञानी + कर्म यानी असली वाला कर्मयोगी कहलाएंँ।
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