
पहली कड़ी में रूमी की बात आचार्य प्रशांत यूँ रखते हैं
“इश्क़ का मतलब होता है अपने आप को उससे जोड़ लेना, जो तुम्हें आसमान तक ले जा सके।”
यहीं से एक सवाल उठता है।
अब यह कैसे पता चले कि जिसकी संगति में हम हैं,
वह सच में जीवन को ऊँचाई दे रही है या नहीं?
क्या इसका कोई संकेत हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में ठोस रूप में दिखाई भी देता है?
“ऐ दिल, मुबारक हो तुझे, आशिक़ों के दायरे में शामिल हो जाना।”
यह “आशिक़ों का दायरा” कोई कल्पना नहीं है ;यह उन लोगों की संगति है जिनका रुख़ ऊँचाई की ओर है। और उसका प्रभाव हमारे चुनावों में साफ़ उतरने लगता है; जीवन के हर पहलू में : व्यवहार में, शारीरिक स्वास्थ्य में, और सौंदर्य में भी।
इस वीडियो श्रृंखला में आचार्य प्रशांत रूमी के इश्क़ को हमारे रोज़मर्रा के जीवन में देखने का मौका देते हैं।
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