Acharya Prashant (AP) Books | समय + प्रेम सीखना पड़ता है + दुर्गासप्तशती + शिवोहम् + क्लाइमेट चेंज + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
समय + प्रेम सीखना पड़ता है + दुर्गासप्तशती + शिवोहम् + क्लाइमेट चेंज + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पाँच पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए पाँच पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! समय + प्रेम सीखना पड़ता है + दुर्गासप्तशती + शिवोहम् + क्लाइमेट चेंज + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
समय:
मन समय में जीता है और उसी से सबसे अधिक भयभीत रहता है। अतीत, वर्तमान और भविष्य में उलझा मन समय के वास्तविक स्वरूप को समझ नहीं पाता।
इस पुस्तक में आचार्य प्रशांत बताते हैं कि समय क्या है और इस अमूल्य संसाधन का सदुपयोग करके जीवन को सार्थक कैसे बनाया जा सकता है।
प्रेम सीखना पड़ता है:
हम जिसे प्रेम कहते हैं, वह केवल भावनात्मक आकर्षण नहीं है। प्रेम नैसर्गिक नहीं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया है।
प्रेम मन का सत्य और शांति की ओर सतत प्रवाह है। प्रेम की वास्तविक संभावना केवल जागरूक मनुष्य के लिए है।
दुर्गासप्तशती:
दुर्गासप्तशती देवी, असुर और युद्ध के प्रतीकों के माध्यम से हमारे भीतर के दम्भ, मोह और अज्ञान को समझाती है।
यह पुस्तक कर्मकांड से आगे बढ़कर देवी उपासना का वास्तविक अर्थ बताती है और स्पष्ट करती है कि असुर हमारी अपनी ही वृत्तियाँ और कुत्सित वासनाएँ हैं।
शिवोहम्:
शिव माने बोध। ऋभुगीता के अनुसार शिव प्रकाश रूप हैं। उस प्रकाश में स्वयं को और अपने जीवन को देखना ही शिव का संदेश है।
शिव कोई व्यक्ति, देवता या ईश्वर नहीं, बल्कि मन के केंद्र, बोध और सत्य के प्रतीक हैं। शिव हमारे सभी भ्रमों और किस्सों से मुक्ति का लक्ष्य हैं, इसलिए उन्हें एक और कहानी या देवता बना लेना उनके वास्तविक अर्थ से दूर जाना है।
शिव न देवता हैं, न भगवान् हैं, न ईश्वर हैं; सत्य मात्र हैं। अंतर करना सीखो!
क्लाइमेट चेंज:
क्लाइमेट चेंज आज मानवता के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। बढ़ता तापमान, चरम मौसम और विलुप्त होती प्रजातियाँ इसके गंभीर संकेत हैं।
यह पुस्तक बताती है कि पर्यावरण संकट का मूल कारण मन की अज्ञानपूर्ण प्रवृत्तियाँ हैं और स्थायी समाधान भी मन की सही समझ से ही संभव है।