सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! शिवोहम् + दुर्गासप्तशती सार + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
शिवोहम्:
शिव माने बोध। ऋभुगीता कहती है कि शिव प्रकाश रूप हैं। उस प्रकाश में अपनी हालत और अपनी ज़िंदगी को देखो। यही महाशिवरात्रि का पर्व है।
‘शिव’ किसी व्यक्ति या देवता का नाम नहीं, बल्कि मन के केंद्र, बोध और सत्य का प्रतीक हैं। शिव हमारे सब किस्सों का लक्ष्य हैं; उन्हें एक और किस्सा या देवता बना लेना उनके वास्तविक अर्थ को खो देना है।
शिव न देवता हैं, न भगवान् हैं, न ईश्वर हैं; सत्य मात्र हैं। अंतर करना सीखो!
दुर्गासप्तशती सार:
नवरात्रि का पर्व केवल पूजा का अवसर नहीं, बल्कि उसके गहरे आध्यात्मिक अर्थ को समझने का निमंत्रण है। श्रीदुर्गासप्तशती के प्रतीक—देवी, असुर, देवता और प्रकृति—हमारे अपने जीवन की ओर संकेत करते हैं।
इस पुस्तक में आचार्य प्रशांत सरलता से इन प्रतीकों का वेदान्तिक अर्थ समझाते हैं और बताते हैं कि वे आज के जीवन में कैसे सार्थक हैं। यह पुस्तक दुर्गासप्तशती के मर्म को सार रूप में प्रस्तुत करती है।