सभी पाठकों के लिए चार पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! शिवोहम् + आत्मज्ञान + वेदान्त + श्रीमद्भगवद्गीता भाष्य (भाग 1) [Hardbound] + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
शिवोहम्:
शिव बोध और सत्य के प्रतीक हैं। ऋभुगीता के अनुसार शिव प्रकाश रूप हैं—उस प्रकाश में स्वयं को और अपने जीवन को देखना ही शिव का संदेश है। शिव हमारे सभी भ्रमों और किस्सों से मुक्ति का लक्ष्य हैं, इसलिए उन्हें केवल एक देवता या कहानी बना लेना उनके वास्तविक अर्थ से दूर जाना है।
शिव न देवता हैं, न भगवान् हैं, न ईश्वर हैं; सत्य मात्र हैं। अंतर करना सीखो!
आत्मज्ञान:
आत्मज्ञान का अर्थ आत्मा का ज्ञान नहीं, बल्कि अहंकार का ज्ञान है। जब जीवन की गति के बीच ही आप अपने कर्मों के कर्ता को पहचानते हैं, तभी वास्तविक जागरूकता आती है। आत्मज्ञान बताता है कि वृत्तियों और अहंकार को समझे बिना निष्काम कर्म संभव नहीं।
वेदान्त:
आत्म-जिज्ञासा के बिना मनुष्य जीवन का वास्तविक मूल्य नहीं समझ पाता। यह पुस्तक वेदान्त के मूल सिद्धांतों और उपनिषदों के गूढ़ सूत्रों को सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। आध्यात्मिक यात्रा प्रारम्भ करने वाले और उसमें आगे बढ़ चुके—दोनों प्रकार के पाठकों के लिए यह समान रूप से उपयोगी है।
श्रीमद्भगवद्गीता भाष्य:
श्रीमद्भगवद्गीता रणक्षेत्र में खड़े अर्जुन को दिया गया व्यावहारिक वेदान्त है। आचार्य प्रशांत का यह भाष्य गीता के शुद्ध वेदान्तसम्मत अर्थ को सरलता से प्रस्तुत करता है। इसमें श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय पाँच से अठारह तक के मुख्य श्लोकों की विस्तृत व्याख्या संकलित है।