Acharya Prashant (AP) Books | 🔥 असली युद्ध अपने विरुद्ध [₹99/Book]🔥
🔥 असली युद्ध अपने विरुद्ध [₹99/Book]🔥
तीन पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए तीन पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर! संघर्ष + वेदान्त + समय + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त] पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।
संघर्ष:
जीवन प्रतिपल संघर्ष तो है ही, पर हम यह नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौनसा संघर्ष उचित है। और फिर हम छोटी लड़ाइयों में उलझकर बड़ी और महत्वपूर्ण लड़ाई से चूक जाते हैं।
बड़ी लड़ाई वो है जो अपने विरुद्ध की जाती है, असली संघर्ष वो है जो मन के विकारों को हटाने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे हमारा मन सुलझता जाता है, वैसे-वैसे हम बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी सक्षम होते जाते हैं। इस पुस्तक में हमें आचार्य प्रशांत से समझने को मिलेगा कि सही संघर्ष कौनसा है, वह क्यों ज़रूरी है और यह कि आनंद तो स्वयं से जूझने में ही है।
वेदान्त:
आत्म-जिज्ञासा के अभाव में मनुष्य अपना सबसे कीमती संसाधन, अपना जीवन ही खोता चलता है। चिन्ता कर-करके कुछ हासिल भी कर लिया तो ये कभी नहीं समझ पाता कि जो हासिल किया उसकी कीमत क्या, और वह हासिल करने के लिए जो गँवाया, उसकी कीमत क्या! यही कारण है कि सनातन धर्म के प्रमुख ग्रंथों में आत्म-जिज्ञासा को सबसे ऊँचा स्थान दिया गया है।
जिसे हम सनातन धर्म कहते हैं वह वेदों में अभिव्यक्त होता है, और वेदों के उत्कृष्ट शिखर को ही वेदान्त कहा जाता है। वेदों के ज्ञानकाण्ड के अंतर्गत आता है वेदान्त, जिसमें मात्र आत्म-जिज्ञासा को प्रधानता दी गयी है। प्रश्नों की एक लम्बी श्रृंखला वेदान्त में आकर अंतर्मुखी हो जाती है। और यह कहना गलत नहीं होगा कि उपनिषद् ही वेदान्त हैं, वेदों का शिखर हैं।
इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत वेदान्त के मूल सिद्धांतों को समझाते हैं और प्रमुख उपनिषद् सूत्रों में छुपे गूढ़ रहस्यों को सरलता के साथ उजागर करते हैं। यह पुस्तक एक भेंट है उनके लिए जो अपनी आध्यात्मिक यात्रा में थोड़ा आगे बढ़ चुके हैं, साथ-ही-साथ उनके लिए भी जिन्होंने अपनी यात्रा बस अभी शुरू ही की है।
समय:
इंसान का मन समय में ही जीता है और समय से ही सबसे ज़्यादा भयभीत रहता है। अतीत, वर्तमान और भविष्य — हम समय को इन तीन भागों में बाँटकर देखते हैं। मन या तो अतीत की स्मृतियों में खोया रहता है या भविष्य की कल्पनाओं में। पर यह कभी समझ नहीं पाता कि समय है क्या।
दुनियाभर के दार्शनिकों, विचारों और वैज्ञानिकों ने काल को गहराई से समझने का प्रयास किया है पर कुछ ही लोग हुए हैं जो काल को जानकार कालातीत में प्रवेश कर पाये हैं।
इस पुस्तक में हमें आचार्य प्रशांत समझा रहे हैं कि समय क्या है और कैसे हम इस महत्वपूर्ण संसाधन का सदुपयोग करके अपने जीवन को सार्थक बना सकते हैं।