संघर्ष + हनुमान चालीसा का वेदान्तिक अर्थ + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

संघर्ष + हनुमान चालीसा का वेदान्तिक अर्थ + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
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Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
संघर्ष + हनुमान चालीसा का वेदान्तिक अर्थ + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

संघर्ष:

जीवन प्रतिपल संघर्ष तो है ही, पर हम यह नहीं जान पाते कि हमारे लिए कौनसा संघर्ष उचित है। और फिर हम छोटी लड़ाइयों में उलझकर बड़ी और महत्वपूर्ण लड़ाई से चूक जाते हैं।

बड़ी लड़ाई वो है जो अपने विरुद्ध की जाती है, असली संघर्ष वो है जो मन के विकारों को हटाने के लिए किया जाता है। जैसे-जैसे हमारा मन सुलझता जाता है, वैसे-वैसे हम बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी सक्षम होते जाते हैं। इस पुस्तक में हमें आचार्य प्रशांत से समझने को मिलेगा कि सही संघर्ष कौनसा है, वह क्यों ज़रूरी है और यह कि आनंद तो स्वयं से जूझने में ही है।

हनुमान चालीसा का वेदान्तिक अर्थ:

आप हनुमान जी को बस ऐसे सोचो कि 'भूत पिशाच निकट नहीं आवे, महावीर जब नाम सुनावे' — माने रास्ते में जा रहे हैं और भूतों से बहुत डर लगता है तो बीच-बीच में पाठ करते रहते हैं — तो ये दुरूपयोग कर लिया हनुमान का। फिर आप समझे ही नहीं कि हनुमान किसके प्रतीक हैं। धर्म में सिर्फ़ प्रतीक होते हैं, तथ्य तो वहाँ होते ही नहीं। और उन प्रतीकों को पढ़ना पड़ता है, देखना पड़ता है कि इनका इशारा किधर को है। जो इशारा नहीं समझते, उनके लिए बड़ी मुश्किल हो जाती है।

बहुत लोग हैं पश्चिम में जो कहते हैं कि भारतीय वानरों की पूजा करते हैं, 'द मंकी गॉड'। उनको नहीं समझ में आ रहा कि क्या दिखाया जा रहा है, क्योंकि वानर हम सब हैं। शरीर से हम सब बिलकुल वानर ही हैं पर वानर होते हुए भी कैसे राम की ओर बढ़ा जा सकता है, इसके प्रतीक हैं हनुमान, 'मंकी गॉड' नहीं हैं। अब ये जाने बिना हनुमान भक्ति कर रहे हो तो क्या कर रहे हो? बस वही कि परीक्षा में पास करवा देना, नौकरी दिला देना, पत्नी दिला देना, या और कामनाएँ। उसमें क्या है?

जब तक उनके वानर रूप का अर्थ नहीं जाना, जब तक ये नहीं जाना कि हम सब वानर हैं और वानर होते हुए भी हृदय में राम हो सकते हैं, तब तक हनुमान आपके लिए सार्थक नहीं हुए। और सिर्फ़ वेदान्त के ही आधार पर किसी भी बात की, कथा की या दर्शन की व्याख्या की जा सकती है। वेदान्त कुंजी है, उसी से सारे ताले खुलेंगे। वेदान्त ये नहीं कह रहा कि बाकी दरवाज़ों पर मत जाओ, सिर्फ़ एक दरवाज़े से प्रवेश करो; वेदान्त कह रहा है सब दरवाज़ों पर जाओ लेकिन कुंजी यहाँ से मिलेगी। वो कुंजी नहीं ली तो कोई दरवाज़ा नहीं खुलेगा तुम्हारे लिए। वेदान्त अपनेआप में कुछ है नहीं, एक कुंजी भर है। वो कुंजी ले लो फिर तुम्हें जिस धारा में प्रवेश करना हो, कर लो।
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