रात और चाँद + दुर्गासप्तशती सार + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

रात और चाँद + दुर्गासप्तशती सार + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]

दो पुस्तकों का कॉम्बो मुफ़्त स्टिकर के साथ
Description
सभी पाठकों के लिए दो पुस्तकों का विशेष कॉम्बो भारी छूट पर!
रात और चाँद + दुर्गासप्तशती सार + [1 आचार्य प्रशांत कोट्स स्टिकर मुफ़्त]
पढ़ें और जीवन को सही दिशा दें।

रात और चाँद:

आचार्य प्रशांत द्वारा रचित अजर व रमणीय कविताओं को इस पुस्तक में एकत्रित किया गया है।

मध्यरात्रि होने पर जब संसार प्रगाढ़ निद्रावस्था में लीन होता था तब उनकी कलम से प्रादुर्भूत होती ये कविताएँ जीवन के यथार्थ दर्शन का अति सुलभ रूप में चित्रण करती थीं।

ये कविताएँ चाँद की भाँति इस तमोमय संसार में उस स्रोत की ओर इंगित करती हैं जो स्वयं चाँद को प्रकाशित करता है।

दुर्गासप्तशती सार:

वर्ष में दो बार धूमधाम से नवरात्रि मनाई‌ जाती है, नौ दिन देवी पूजा होती है, पर क्या हम सचमुच इस पर्व और देवी के मर्म को समझते हैं?

श्रीदुर्गासप्तशती, जो नवरात्रि का केंद्रीय ग्रंथ‌ है, उसमें जीवन के रहस्य को समझने के लिए अनेकों प्रतीकों का प्रयोग किया गया है — प्रकृति, पशु-पक्षी, असुर, देवता, और देवी स्वयं। ये प्रतीक हमारे जीवन‌ में किस प्रकार सार्थक हैं? इनका आज के संदर्भ में क्या अर्थ है?

इस पुस्तक के माध्यम से आचार्य प्रशांत बड़े ही अनूठेपन व सरलता से इन प्रतीकों का अर्थ बताते हैं और इनका आज के जीवन में उपयोग समझाते हैं।

यह पुस्तक दुर्गा सप्तशती ग्रंथ को सार रूप में आप तक लाने का एक प्रयास है।
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